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"तम
की धार पर डोलती जगती की नौका"
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नदिया
स्नेह
बूँद
सिकता
बनती
अब तो ठंढी हो चली जीवन की राख
कथापर्व -- कहानी संग्रह
यह जग केवल स्वप्न असार